Musical Tribute on Gandhi Jayanti

musical tribute on gandhi jayanti

Musical Tribute on Gandhi Jayanti

On this occasion, Guitarmonk dedicates the contemplative prayer, and inspirational song, Humko Man Ki Shakti De Na (give us the power to win our minds before we win others.) as a tribute to one of the greatest man to ever lived in India.  Kapil Srivastava and its guitarist team from Delhi, planned to record the beautiful music and devotional song of movie Guddi on Guitar. The whole tune was recorded in less than half hour having lead guitar, arpeggio and just simple chord strumming instead of running rhythm.

This guitar tune can also be used as a wonderful melody for teaching by guitar teachers for their guitar students.
Rearranged on guitar by Kapil Srivastava as an instrumental version (you can listen above) and being made into a video (will be launched soon) to inspire the younger generation with the importance of Mahatma Gandhi’s priceless contribution to our country and the rest of the world.

Mohandas Karamchand Gandhi (Mahatma Gandhi) is India’s symbol of peace, harmony, spiritual discovery and independence. He was the greatest political figure in India’s history and most admired.

Bapu Gandhi championed on social equality and communal harmony. He took it as a personal mission to deliver the message of peace through silent resistance in Indian Freedom Struggle with satyagraha. Despite being sent to jail many times, he endured it all for the sake of his love for the people and the country, India. He loved life and looked at life as the invaluable driving force that can save humanity from atrocities through the use of non-violence protests as catalyst of social change.

Through the sacrifices and selflessness of Gandhiji, we are now enjoying India’s Independence. His ideologies continue to ignite social movements around the world. Indeed, as Gandhi believes, “You must be the change you want to see the world.”

The life and teachings of Mahatma Gandhi is full of inspiring lessons that sets a good example of how simplicity, humility, compassion, truthfulness and love of one’s country can bring hope, peace and love to every nation.

Mahatma Gandhi, the Father of the Nation and whose legacy of glorifying peace and non-violence, faith in truth and justice for all mankind  has marked a deep and lasting effect to each and everyone of us, has a special day that is well celebrated and commemorated in India and the rest of the world. October 2, also the birthday of Mahatma Gandhi  has been declared by the United Nations General Assembly as Gandhi Jayanti or International Day of Non-Violence in 2007.

गुदड़ी के लाल – लाल बहादुर शास्त्री

गुदड़ी के लाल - लाल बहादुर शास्त्रीहम सब को जय जवान जय किसान का नारा तो याद ही होगा और साथ साथ ये भी याद होगा कि इस नारे को हमे दिया किसने था? जी, सही याद किया आपने हमारे स्वतंत्र देश के दुसरे प्रधानमंत्री जिन्हें गुदड़ी का लाल भी कहा जाता है श्री लाल बहादुर शास्त्री ने. और आज के दिन यानि 2 अक्टूबर 1904 में उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में उनका जन्म हुआ था. यानि हमारे राष्ट्रपिता श्री मोहन दास करमचंद गाँधी यानि महात्मा गाँधी और श्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिवस एक ही दिन होता है और इस किसी ने क्या खूब कहा है, “आज का दिन है 2 अक्टूबर, आज का दिन बड़ा महान. आज के दिन दो फुल खिले जिससे महका हिंदुस्तान. जय जवान जय किसान…”

उनका जन्मदिवस गांधी जी के जन्मदिवस के समान होने की तरह व्यक्तित्व और विचारधारा भी गांधी जी के जैसे ही थे. शास्त्री जी गांधी जी के विचारों और जीवनशैली से बेहद प्रेरित थे. शास्त्री जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में गांधीवादी विचारधारा का अनुसरण करते हुए देश की सेवा की और आजादी के बाद भी अपनी निष्ठा और सच्चाई में कमी नहीं आने दी.

सादा जीवन और उच्च विचार कहने वाले लाल बहादुर शास्त्री ने यह दुनिया को जता दिया कि अगर इंसान के अंदर आत्मविश्वास हो तो वो कोई भी मंजिल पा सकता है.

शास्त्री जी के पिता का नाम श्री शारदा प्रसाद श्रीवास्तव था, अर्थात वो जाति से श्रीवास्तव थे. लेकिन उन्होने अपने नाम के साथ अपना उपनाम लगाना छोड़ दिया था क्योंकि वह जाति प्रथा के घोर विरोधी थे. उनके नाम के साथ जुड़ा ‘शास्त्री’ काशी विद्यापीठ द्वारा दी गई उपाधि है, उनके प्रथम श्रेणी से पास होने पर.

शास्त्रीजी का समस्त जीवन देश की सेवा में ही बीता. देश के स्वतंत्रता संग्राम और नवभारत के निर्माण में शास्त्रीजी का महत्वपूर्ण योगदान रहा. स्वाधीनता आंदोलन के दौरान वे सात बार जेल गए। अपने जीवन में कुल मिलाकर 9 वर्ष उन्हें कारावास की यातनाएँ सहनी पड़ीं. सन्‌ 1926 में शास्त्रीजी ने लोक सेवा समाज की आजीवन सदस्यता ग्रहण की और इलाहाबाद को अपना कार्य-क्षेत्र चुना. बाद में वे इलाहाबाद नगर पालिका, तदोपरांत इम्प्रुवमेंट ट्रस्ट के भी सदस्य रहे.

सन्‌ 1947 में शास्त्रीजी उत्तरप्रदेश के गृह और परिवहन मंत्री बने. इसी पद पर कार्य करते समय शास्त्रीजी की प्रतिभा पहचान कर 1952 के पहले आम चुनाव में कांग्रेस पार्टी के चुनाव आंदोलन को संगठित करने का भार नेहरूजी ने उन्हें सौंपा. 1952 में ही शास्त्रीजी राज्यसभा के लिए चुने गए. उन्हें परिवहन और रेलमंत्री का कार्यभार सौंपा गया. परन्तु 4 वर्ष पश्चात्‌ 1956 में अडियालूर रेल दुर्घटना के लिए, जिसमें कोई डेढ़ सौ से अधिक लोग मारे गए थे, अपने को नैतिक रूप से उत्तरदायी ठहरा कर उन्होंने रेलमंत्री का पद त्याग दिया. शास्त्रीजी के इस निर्णय का देशभर में स्वागत किया गया.

अपने सद्गुणों व जनप्रिय होने के कारण 1957 के द्वितीय आम चुनाव में वे विजयी हुए और पुनः केंद्रीय मंत्रिमंडल में परिवहन व संचार मंत्री के रूप में सम्मिलित किए गए. सन्‌ 1958 में वे वाणिज्य व उद्योगे मंत्री बनाए गए. पं. गोविंद वल्लभ पंत के निधन के पश्चात्‌ सन्‌ 1961 में वे गृहमंत्री बने, किंतु सन्‌ 1963 में जब कामराज योजना के अंतर्गत पद छोड़कर संस्था का कार्य करने का प्रश्न उपस्थित हुआ तो उन्होंने सबसे आगे बढ़कर बेहिचक पद त्याग दिया.

पंडित जवाहरलाल नेहरू जब अस्वस्थ रहने लगे तो उन्हें शास्त्रीजी की बहुत आवश्यकता महसूस हुई. जनवरी 1964 में वे पुनः सरकार में अविभागीय मंत्री के रूप में सम्मिलित किए गए. तत्पश्चात्‌ पंडित नेहरू के निधन के बाद, चीन के हाथों युद्ध में पराजय की ग्लानि के समय 9 जून 1964 को उन्हें प्रधानमंत्री का पद सौंपा गया. सन्‌ 1965 के भारत-पाक युद्ध में उन्होंने विजयश्री का सेहरा पहना कर देश को ग्लानि और कलंक से मुक्त करा दिया.

उनके प्रधानमंत्रित्व काल में देश में भीषण मंदी का दौर था। देश के कई हिस्सों में भयानक अकाल पड़ा था. जिसपर अमेरिका के प्रतिमाह अन्नदान देने की पेशकश पर तो शास्त्रीजी तिलमिला उठे किंतु संयत वाणी में उन्होंने देश का आह्वान किया- ‘पेट पर रस्सी बाँधो, साग-सब्जी ज्यादा खाओ, सप्ताह में एक शाम उपवास करो. हमें जीना है तो इज्जत से जिएँगे वरना भूखे मर जाएँगे. बेइज्जती की रोटी से इज्जत की मौत अच्छी रहेगी.’ गरीबी में जन्मे, पले और बढ़े शास्त्रीजी को बचपन में ही गरीबी की मार की भयंकरता का बोध हो गया था, फलतः उनकी स्वाभाविक सहानुभूति उन अभावग्रस्त लोगों के साथ रही जिन्हें जीवनयापन के लिए सतत संघर्ष करना पड़ता है. वे सदैव इस हेतु प्रयासरत रहे कि देश में कोई भूखा, नंगा और अशिक्षित न रहे तथा सबको विकास के समान साधन मिलें. शास्त्रीजी का विचार था कि देश की सुरक्षा, आत्मनिर्भरता तथा सुख-समृद्धि केवल सैनिकों व शस्त्रों पर ही आधारित नहीं बल्कि कृषक और श्रमिकों पर भी आधारित है. इसीलिए उन्होंने नारा दिया, ‘जय जवान, जय किसान.’

शास्त्री जी का प्रधानमंत्री कार्यकाल काफी छोटा रहा क्योंकि जिस समय वह प्रधानमंत्री बने उस साल 1965 में पाकिस्तानी हुकूमत ने कश्मीर घाटी को भारत से छीनने की योजना बनाई थी. लेकिन शास्त्री जी ने दूरदर्शिता दिखाते हुए पंजाब के रास्ते लाहौर में सेंध लगा पाकिस्तान को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. इस हरकत से पाकिस्तान की विश्व स्तर पर बहुत निंदा हुई. पाक हुक्मरान ने अपनी इज्जत बचाने के लिए तत्कालीन सोवियत संघ से संपर्क साधा जिसके आमंत्रण पर शास्त्री जी 10 जनवरी 1966 में पाकिस्तान के साथ शांति समझौता करने के लिए ताशकंद गए. इस समझौते के तहत भारत-पाकिस्तान के वे सभी हिस्से लौटाने पर सहमत हो गया जहाँ भारतीय फौज ने विजय के रूप में तिरंगा झंडा गाड़ दिया था. और वो दिन भारत के इतिहास कि चिर-स्मरणीय गया और उसी दिन रात्रि में उन्हें दिल का दौरा पड़ने शास्त्री जी मौत हो गई. हालांकि उनकी मृत्यु को लेकर आज तक कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं लाई गई है. उनके परिजन समय-समय पर उनकी मौत पर सवाल उठाते रहे हैं. यह देश के लिए एक शर्म का विषय है कि उसके इतने काबिल नेता की मौत का कारण आज तक साफ नहीं हो पाया है. साल 1966 में ही उन्हें भारत का पहला मरणोपरांत भारत रत्न का पुरस्कार भी मिला था जो इस बात को साबित करता है कि शास्त्री जी की सेवा अमूल्य है.

आज राजनीति में जहां हर तरफ भ्रष्टाचार का बोलबाला है वहीं शास्त्री जी एक ऐसे उदाहरण थे जो बेहद सादगी पसंद और ईमानदार व्यक्तित्व के स्वामी थे. अपनी दूरदर्शिता की वजह से उन्होंने पाकिस्तान को गिड़गिडाने पर विवश कर दिया था. हालांकि ताशकंद समझौता भारत की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरा पर फिर भी उन्होंने दुनिया को भारत की ताकत का अंदाजा दिला दिया था.

आज एक बार फिर से देश को लाल बहादुर शास्त्री जैसे लोगों की जरूरत है, क्योंकि आज देश को महंगाई ने अपने मकड़जाल में घेर रखा है और आम जनता के सामने दो जून की रोटी का प्रश्न है। ऐसे में अगर देश के लोग फिर से अपने लाल को याद करके आगे बढ़े तो निश्चित रूप से देश अपनी समस्या से मुक्ति पा लेगा।

एक अत्यंत गरीब परिवार में जन्मा बालक भी अपने परिश्रम व सद्गुणों द्वारा विश्व इतिहास में कैसे अमर हो सकता है, इसका ज्वलंत उदाहरण थे भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री श्री लालबहादुर शास्त्री। शायद इसलिए उनके बारे में कहा गया है कि उठा धरा से पहुँच शिखर, आकाश बन गया, धरा देखती रह गई और पुत्र इतिहास बन गया.

इस भारत के वीर पुत्र कि गिटारमोंक सोशल कि तरफ से कोटि कोटि नमन.

Music Therapy and Meditation Drive

Music Therapy and Meditation Drive

Music Therapy and Meditation Drive

With an objective to serve music health benefits, a social get-together, to create a moment of rejoice, a moment of mental relaxation and healing, Guitarmonk social organizes regular music therapy and meditation drive at various societies in Delhi-NCR. It includes performing devotional bhajans, instrumental therapy music, musical meditational techniques at various residential societies i.e. inside the residential society premises only.

Currently, these music therapy and meditation drive is held at various societies of Chander Nagar, Ramprastha, Noida Sector -55, Noida Sector – 51, Vaishali, Indirapuram & various locations in Ghaziabad.

To conduct similar music therapy and meditation drive email at social@guitarmonk.com.

हिन्दी दिवस

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हिन्दी दिवस

१४ सितंबर को ही हिन्दी दिवस क्यों मनाते हैं…

हिन्दी दिवस एक बार फिर से सम्मुख है। हम हिन्दी की बात कर रहे हैं। उसको अपनाए जाने की बात कर रहे हैं। पर हिन्दी दिवस मनाते ही क्यों हैं, हिन्दी तो एक शाश्वत भाषा है उसका कोई जन्मदिवस कैसे हो सकता है। पर हमारे यहां है, जिस धरती की वह भाषा है जहां उसका विकास उद्भव हुआ वहां उसका दिवस है। और दिवस भी यों नहीं बल्कि यह दिन याद कराता है कि हिन्दी उसका दर्जा देने के लिए देश की संविधान सभा में जम कर बहस हुई। हिन्दी के पक्षधर भी हिन्दी में नहीं बल्कि अंग्रेजी में बोले।

संविधान सभा में हिन्दी की स्थिति को लेकर 12 सितंबर, 1949 को 4 बजे दोपहर में बहस शुरू हुई और 14 सितंबर, 1949 को दिन में समाप्त हुई। बहस के प्रारंभ होने से पहले संविधान सभा के अध्यक्ष और देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अंग्रेज़ी में ही एक संक्षिप्त भाषण दिया। जिसका निष्कर्ष यह था कि भाषा को लेकर कोई आवेश या अपील नहीं होनी चाहिए और पूरे देश को संविधानसभा का निर्णय मान्य होना चाहिए। भाषा संबंधी अनुच्छेदों पर उन्हें लगभग तीन सौ या उससे भी अधिक संशोधन मिले। 14 सितंबर की शाम बहस के समापन के बाद भाषा संबंधी संविधान का तत्कालीन भाग 14 क और वर्तमान भाग 17, संविधान का भाग बन गया तब डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा, अंग्रेज़ी से हम निकट आए हैं, क्योंकि वह एक भाषा थी। अंग्रेज़ी के स्थान पर हमने एक भारतीय भाषा को अपनाया है। इससे अवश्य हमारे संबंध घनिष्ठ होंगे, विशेषतः इसलिए कि हमारी परंपराएँ एक ही हैं, हमारी संस्कृति एक ही है और हमारी सभ्यता में सब बातें एक ही हैं। अतएव यदि हम इस सूत्र को स्वीकार नहीं करते तो परिणाम यह होता कि या तो इस देश में बहुतसी भाषाओं का प्रयोग होता या वे प्रांत पृथक हो जाते जो बाध्य होकर किसी भाषा विशेष को स्वीकार करना नहीं चाहते थे। हमने यथासंभव बुद्धिमानी का कार्य किया है और मुझे हर्ष है, मुझे प्रसन्नता है और मुझे आशा है कि भावी संतति इसके लिए हमारी सराहना करेगी।

इस प्रकार 14 सितंबर भारतीय इतिहास में हिन्दी दिवस के रूप में दर्ज हो गया। (अब यह भावी संतति, यानी हम पर है कि हम हिन्दी को यह सम्मान देने के लिए उनकी सराहना करते हैं या नहीं) संवैधानिक स्थिति के आधार पर तो आज भी भारत की राजभाषा हिंदी है और अंग्रेज़ी सह भाषा है, लेकिन वास्तविकता क्या है यह किसी से छुपी नहीं है। 13 सितंबर 1949 को प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने भाषा संबंधि बहस में भाग लेते हुए कहा, किसी विदेशी भाषा से कोई राष्ट्र महान नहीं हो सकता। क्योंकि कोई भी विदेशी भाषा आम लोगों की भाषा नहीं हो सकती। भारत के हित में, भारत को एक शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के हित में, ऐसा राष्ट्र बनाने के हित में जो अपनी आत्मा को पहचाने, जिसे आत्मविश्वास हो, जो संसार के साथ सहयोग कर सके, हमें हिंदी को अपनाना चाहिए।

डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने बहस में भाग लेते हुए हिंदी भाषा और देवनागरी का राजभाषा के रूप में समर्थन किया और भारतीय अंकों के अंतर्राष्ट्रीय अंकों को मान्यता देने के लिए अपील की। उन्होंने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए संविधान सभा से अनुरोध किया कि वह ”इस अवसर के अनुरूप निर्णय करे और अपनी मातृभूमि में राष्ट्रीय एकता स्थापित करने में वास्तविक योग दे।” उन्होंने कहा कि अनेकता में एकता ही भारतीय जीवन की विशेषता रही है और इसे समझौते तथा सहमति से प्राप्त करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम हिंदी को मुख्यतः इसलिए स्वीकार कर रहे हैं कि इस भाषा के बोलनेवालों की संख्या अन्य किसी भाषा के बोलनेवालों की संख्या से अधिक है – लगभग 32 करोड़ में से 14 करोड़ (1949 में)। उन्होंने अंतरिम काल में अंग्रेज़ी भाषा को स्वीकार करने के प्रस्ताव को भारत के लिए हितकर माना। उन्होंने अपने भाषण में इस बात पर बल दिया और कहा कि अंग्रेज़ी को हमें ”उत्तरोत्तर हटाते जाना होगा।” साथ ही उन्होंने अंग्रेज़ी के आमूलचूल बहिष्कार का विरोध किया। उन्होंने कहा, ”स्वतंत्र भारत के लोगों के प्रतिनिधियों का कर्तव्य होगा कि वे इस संबंध में निर्णय करें कि हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं को उत्तरोत्तर किस प्रकार प्रयोग में लाया जाए और अंग्रेज़ी को किस प्रकार त्यागा जाए।

World Ozone Day

world ozone day

World Ozone Day

On the 16th of September, will be “World Ozone Day.” This International Day for the Preservation of the Ozone Layer has been celebrated since 1994 as established by the United Nations General Assembly. This year’s theme is “Ozone Layer Protection: The Mission Goes On.” 

When the world finally unite to curb the damage on the Ozone Layer and to stop a major environmental catastrophe, the  stars too must have aligned when the  Montreal Protocol on Substances that Deplete the Ozone Layer  was signed in 1987.

The ozone layer is a delicate shield of gas that serves as a protective covering to preserve life in our planet, Earth from the harmful ultraviolet rays of the sun. It is made up of oxygen and is naturally present in the atmosphere. The depletion of ozone means the ozone layer will become thinner.

From Whole to Hole…….

It was in the 70s when scientists discovered a gaping hole in the thin layer of the earth’s atmosphere. This alarming phenomenon emerged when a significant thinning of the ozone layer began to appear above the Antartic and the primary cause was linked to the ozone-depleting substances (ODS) that includes chlorofluorocarbons (CFCs), Hydrochlorofluorocarbns (HCFCs), halons, methyl bromide, carbon tetrachloride, and methyl chloroform. These chemicals are found in aerosol cans and also commonly used as coolants for refrigerators, cars and centralized airconditioning, fire extinguishers, etc.

With the marked increase in the emission of these harmful gases into the atmosphere, the ozone hole got bigger and the threats of the sun’s harmful rays directly hitting the earth would have serious impacts to human health such as skin cancer cataracts and blindness, immunosuppression or weakening of the human immune system. Plants, animals and the ecosystem will also not be spared by the UV. The negative effects on plants growth, lower yields from major crops, plant diseases, while animals may also suffer from eye and skin cancers, growth and development problems as well as the decrease in planktons that can disrupt the fresh and saltwater food chain and the eventual loss of biodiversity in the ecosystem.

The good news is………

The phasing out of ozone-depleting substances and the reduction of related products have contributed significantly in the global campaign to address the depletion and damage in the ozone layer.

The ozone layer is now beginning to heal. Though the process has been in place for some years, this time the ozone layer was fund to be repairing itself naturally. And according to the latest UN assessment and by some 300 scientists, the ozone layer will hopefully recover  by 2050, similar to its state in the 80’s. And to achieve that, the world has to strive to continue and improve more of its efforts to address the challenges that we face to curb the man-made activities and products that do more harm than good to the environment.

The Montreal Protocol has proven to be an effective model for how nations around the globe can work hand in hand together in saving the world from a global environmental catastrophe.t

So lets make ourselves and others aware about the significance of world ozone day.

You can also share your experience/suggestion pertaining to this day below.

World Suicide Prevention Day

world suicide prevention day

World Suicide Prevention Day

Light a Candle near a window at 8pm today to show your support

Suicide is a major public health problem. The psychological pain that leads each of these individuals to take their lives is unimaginable. Their deaths leave families and friends bereft, and often have a major ripple effect on communities.

Every year, over 800,000 almost people die from suicide; this roughly corresponds to one death every 40 seconds. The number of lives lost each year through suicide exceeds the number of deaths due to homicide and war combined.

Mental disorders (particularly depression and alcohol use disorders) are a major risk factor for suicide in Europe and North America; however,
in Asian countries impulsiveness plays an important role. Suicide is complex with psychological, social, biological, cultural and environmental factors involved……(information source IASP).

10th September is World Suicide Prevention Day and there’s a worldwide candle lighting activity happening at 8pm.

Guitarmonk Social suggests you to light a candle near a window at 8pm to show your support for suicide prevention, to remember a lost loved one and for the survivors of suicide.

If you have any experience to share, please post below

Indian National Sports Day

Indian national sports day

 Indian National Sports Day

 (29th August)

Khelo Kudo Healthy Raho

Guitarmonk Social believes that sports plays an important and indispensable part in education, culture and health programs of the country. Sports help shape the culture and values of its people through the spirit of camaraderie and sportsmanship. A valuable tool in the development of physical, social and emotional well-being of the young and adult members of the community.

Our hectic and demanding routines tend to consume too much of our time on a daily basis. Often, we think that we don’t have any more energy left to spare even for the simplest or most basic tasks at home. Modern lifestyle has reduced us to become work machines and be disconnected to nature. Not realizing that as we continue to disregard the health benefits of sports and physical activities by opting to keep ourselves engrossed in inactivity and unhealthy diets which put us more at risk of chronic lifestyle diseases like obesity, coronary heart disease, diabetes, cancer, neuropsychological disorders etc.

The Role of Sport in Health Promotion

The excitement, joy, the fun and the games, just like in child’s play, seemed to have been lost during the course of continuous technological development that led to even more sedentary lifestyle in most of us.

Let us do our part in restoring the lost glory of India’s sports as we join the whole nation in celebrating the National Sports Day . This is an opportunity for us to show not only our prowess in athletic events but also in valuing the essential contribution of sports in physical and mental health wellness as well as the formation of character, right attitude, healthy competition, skills acquisition, peace and unity from the past generations, in today’s youth  and the future to come.

Physical activities can also ward off depression, anxiety or mood disorders by improving sleep, self-perception and the mood while reducing stress, through the release of the “feel good brain chemicals in the brain (endorphins).” It can also boost one’s self-esteem as one gets more fit and healthy while improving muscle tone and strength. Through sports and exercise, we can get more social interaction, take our minds off our worries, and develop a healthy coping mechanism as we go on our daily life struggles. 

Sports and Recreation

Sports is not just about agility nor physical strength. It also engages the brain to exercise, as mental conditioning and game strategies develop a person’s mental toughness. It is the state of the mind wherein despite keeping an eye on a goal or an opponent, our focus or concentration doesn’t get disrupted.

JoAnn Dahlkoetter, PhD, a sports psychologist, said, “Sports is 90% mental.” Being mentally tough is what separates winners from losers, and people who persist versus quitters.” And everybody can benefit from the mental toughness training at any level of competition.

In promoting a healthy lifestyle, Sports and physical activities remained to be a cost-effective way to keep us engaged and productive at the same time. Watching and playing sports are also a great source of entertainment and recreation for individuals and families, even for the whole neighbourhood and the entire nation.

Guitarmonk Social assumes its duty to utilize the day to  educate and encourage people to take active participation in sports. To create awareness and inculcate the importance of sports to our country, our community and to our people. In support to  this aim, Guitarmonk will also distribute some sports items to the underprivileged and passionate sports enthusiasts to help them fulfill their dream in the field of sports and to spread the joy of giving and sharing.

“Sports is an inexpensive and one of the cheapest  source of joy,” says Kapil Srivastava, founder of  Guitarmonk Social.

Guitarmonk Social commits to take this Indian National sports day participation pledge to 1 lakh users and play a role in building a healthier, happier, active and sports involved community from India to the rest of the world.

To know updates about local sports activities and information relative to Indian National Sports Day. Join Hands with us: